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पूरी दुनिया वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग का सामना कर रही है। ग्लोबल वार्मिंग का कारण तो सब जानते ही हैं और इस समास्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास भी किए जा रहे है। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए नित नए उपाए ढूंढे जा रहे है। प्रकृति को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए नई-नई तकनीकें खोजने के साथ ही उपयोग में भी लाई जा रही है। प्रकृति को वर्तमान में सबसे अधिक नुकसान परिवहन के साधनों के कारण पहुंच रहा है इससे इंकार नहीं किया जा सकता । इसी कारण से परिवहन के क्षेत्र में उन तकनीकों का उपयोग होना शुरु हो चुका है जिससे पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचे और प्रकृति का संतुलन भी बना रहे । यही वजह है कि परिवहन के क्षेत्र में मेट्रो रेल का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। भारत के कई शहरों में मेट्रो रेल सेवा शुरु हो चुकी है। मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर शहर में भी मेट्रो रेल सेवा अतिशीघ्र शुरु करने के प्रयास किये जा रहे हैं ।


नई तकनीकों से युक्त मेट्रो रेल सेवा


मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और औधोगिक नगरी इंदौर में मेट्रो रेल सेवा अगले वर्ष 2023 में शुरु करने का लक्ष्य है और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्रुत गति से कार्य कर रहा है। भोपाल और इंदौर में शीघ्र आरंभ होने वाली मेट्रो रेल को वर्तमान और भविष्य की सबसे आधुनिक तकनीक से युक्त बनाने के भी प्रयास जारी है। मेट्रो रेल में उन सभी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जो सुरक्षा और पर्यावरण के लिहाज से सबसे उत्तम है।


तकनीकी, पर्यावरण और जनसांख्यिकीय परिवर्तन की तीव्र गति मेट्रो रेल की दुनिया को कुछ प्रमुख तकनीकी नवाचारों की ओर ले जा रही है। शहरीकरण में वृद्धि मेट्रो रेल परिवहन के बुनियादी ढांचे पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मेट्रो रेल का शहरी गतिशीलता का स्तंभ बने रहना तय है। परिवहन के एक त्वरित और व्यवहारिक साधन के रूप में यह विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए बड़े महानगरों के विकास के लिए सेवा का सबसे अच्छा विकल्प है। बिजली द्वारा संचालित सार्वजनिक परिवहन ग्रीनहाउस गैस और यातायात की भीड़ से उत्पन्न कण उत्सर्जन को कम करने का यह सबसे प्रभावी तरीका है। इसके अंतर्निहित सिद्धांत सतत् विकास के मुख्य उद्देश्य के अनुरूप हैं। मेट्रो को अभी और भविष्य में आकर्षक बनाने के लिए एक्सेस, साइनेज और सूचना प्रणाली में सुधार पर काफी हद तक निर्भर रहना होगा। नई तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और यात्रा को अधिक कारगर बनाएगी। इसी तरह अधिक कुशल संचालन और रखरखाव के साथ-साथ आधुनिक उपकरण तेजी से उपलब्ध होते जा रहे हैं।


लेकिन मेट्रो सिर्फ यातायात का साधन नहीं है। यह पहचान व्यक्त करते हुए अपने शहर का प्रतीक भी है। शहरी विकास की गति से विकसित हो रहे स्टेशन और जीवन की बदलती लय चेहरे को बदल सकती है, और यहां तक कि मेट्रो की परिभाषा भी बदल सकती है।


डिजिटल क्रांति


मेट्रो रेल, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) के साथ एक डिजिटल क्रांति के दौर से गुजर रही है, जो ऑनबोर्ड सेंसर को वास्तविक समय विश्लेषण (रियल टाइम एनालिसिस) और निगरानी प्रदान करने में देरी होने से पहले समस्याओं का पता लगाने, रखरखाव को स्वचालित करने और ट्रेन का स्थान (लोकेशन) हमेशा 100 प्रतिशत सटीक होना सुनिश्चित करने में सक्षम बनाता है।


नए इस्पात से विकास


समय के साथ नए इस्पात के विकास के बाद मेट्रो ट्रेन परियोजना में जो धातु इस्तेमाल में ली गयी है उसका शक्ति से वजन अनुपात बहुत अच्छा है। साथ ही साथ इसमें उच्च दर्जे की टाइटेनियम मिश्रित धातु (जैसे ग्रेफीन) का प्रयोग किया गया है। यह धातु लम्बे समय तक चलने योग्य, कठोर मौसम के लिए उपयुत्क और पर्यावरण के अनुकूल है।


समस्याओं की पहचान के लिए ड्रोन


मध्य प्रदेश मेट्रो रेल ने पटरियों के ऊपर ड्रोन की व्यवस्था बना रखी है ताकि पहले से ही समस्याओं की पहचान करने, रखरखाव, श्रमिकों की सहायता और अन्य खतरों की स्थिति से अवगत कराके अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सके।


आभासी वास्तविकता (वर्चुअल रियलिटी)


आभासी वास्तविकता (वर्चुअल रियलिटी) इस समय बहुत सुर्खियाँ बटोर रही है और पहले से ही उद्योग के दिग्गज इसको उपयोग में ले रहे है, जिसमें यह उनकी निर्माण प्रक्रिया में शामिल है। लागत और समय की चुनौतियों पर काबू पाने, वीआर निर्माण द्वारा एक उत्पाद का थ्री-डी मॉडल बनाता है, वस्तुतः इसकी दक्षता का परीक्षण करता है और फिर इसे अधिक तेज़ी से और आर्थिक रूप से लाता है।


चालक रहित ट्रेनें


एक चालक रहित मेट्रो ऑपरेशन अधिक अनुमानित नेटवर्क प्रदान करता है क्षमता को अधिकतम करता है जब कई मेट्रो सिस्टम मांग से मिलान करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, यह मानव त्रुटि के तत्व को हटाकर सुरक्षा को और बढ़ाता हैं। पर्यावरणीय चिंताए ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भय और कार्यान्वयन की कम लागत आधुनिक मेट्रो रेलवे के लिए अपने संचालन में स्वचालन के इस उच्चतम ग्रेड को लागू करने का मार्ग प्रशस्त कर रही है।


उच्च स्तरीय समीक्षा एवं अनुश्रवण


भोपाल और इंदौर में निर्माणधीन मेट्रो रेल के निर्माण कार्य की प्रगति पर मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कारर्पोरेशन के प्रबंध संचालक श्री मनीष सिंह लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखे हुए है। वह लगातार भोपाल और इंदौर में सभी तरह के कार्य की प्रगति का अधिकारियों और कांट्रेक्टर के साथ मिलकर समीक्षा कर रहे है और सभी निर्माण कार्य को समय सीमा में पूरा करने के दिशा निर्देश भी दे रहे है। उनके मार्गदर्शन में चल रहे निर्माण कार्य पर नजर डाले तो भोपाल मेट्रो रेल सेवा के लिए प्रायोरिटी कॉरिडोर के तहत सुभाष नगर डिपो में एडमिन भवन की पाइल फाउडेशन का कार्य 100 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। वहीं ऑक्सिलरी सब स्टेशन-1 भवन के सब स्ट्रक्चर ( नींव का काम, प्लिंथ लेवल तक कॉलम और प्लिंथ बीम) का कार्य भी 100 प्रतिशत पूरा हो गया है। इसी कड़ी में ऑक्जिलरी सब स्टेशन -2 के निर्माण के कार्य भी तेजी से चल रहे है, अब तक नींव का काम- 83.33%, प्लिंथ बीम तक के कॉलम- 44.44% पूरा हो चुका है। सुभाष नगर डिपो में निरीक्षण बे के पाइलिंग का कार्य का 63.33 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।



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